03/08/2026
गंगाधर: शिर: पातु भालमर्धेन्दुशेखर: ।
नयने मदनध्वंसी कर्णौ सर्पविभूषण: ।।
गंगा को जटाजूट में धारण करने वाले गंगाधर शिव मेरे मस्त्क की, शिरोभूषण के रूप में अर्धचन्द्र को धारण करने वाले अर्धेन्दुशेखर मेरे ललाट की, मदन को ध्वंस करने वाले मदनदहन मेरे दोनों नेत्रों की, सर्प को आभूषण के रूप में धारण करने वाले सर्पविभूषण शिव मेरे कानों की रक्षा करें ।।
घ्राणं पातु पुरारातिर्मुखं पातु जगत्पति:।
जिह्वां वागीश्वर: पातु कन्धरां शितिकन्धर:।।
त्रिपुरासुर के विनाशक पुराराति मेरे घ्राण (नाक) की, जगत की रक्षा करने वाले जगत्पति मेरे मुख की, वाणी के स्वामी वागीश्वर मेरी जिह्वा की, शितिकन्धर (नीलकण्ठ) मेरी गर्दन की रक्षा करें ।।
जय विश्वनाथ , देवाधिदेव महादेव श्री बाबा काशी विश्वनाथ जी की कृपादृष्टि सदा सर्वदा आप एवं आपके परिवार पर बनी रहे । आपका दिन मंगलमय हो । पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ।